वक़्त की दी टीस, अब शायद वक़्त की भर पायेगा, वक़्त की दी टीस, अब शायद वक़्त की भर पायेगा,
जो पौरुष मृत्यु को भी जीत लाता था, आज वही वीभत्स घटनाओं का क्यों आधार है ? जो पौरुष मृत्यु को भी जीत लाता था, आज वही वीभत्स घटनाओं का क्यों आधार है ?
एक इतिहास दिखता है अवशेषों में अवतरित.... एक इतिहास दिखता है अवशेषों में अवतरित....
भूमिका और सारांश भूमिका और सारांश
अनजान आगे का सफ़र , बूढ़ा हुआ है यह शज़र इससे जिनको छाँव मिले, उनसे ही कई घाव मिले। अनजान आगे का सफ़र , बूढ़ा हुआ है यह शज़र इससे जिनको छाँव मिले, उनसे ही कई ...
जाने कब मैं बड़ा हो गया अपने पैरों पर खड़ा हो गया, वक्त का साया ऐसा था न धेला था न प जाने कब मैं बड़ा हो गया अपने पैरों पर खड़ा हो गया, वक्त का साया ऐसा था ...